Jun 15, 2017

शिवसेना ने RSS को BJP से लड़ाने के लिए बनाया जबरजस्त प्लान, BJP को मिटाने का प्लान: पढ़ें क्या?


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New Delhi: कहने को तो शिवसेना बीजेपी की सहयोगी पार्टी है और NDA गठबंधन में भी शामिल है लेकिन शिवसेना बीजेपी को ख़त्म करने की हर संभव कोशिश कर रही है, शिवसेना जानती है कि बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत आरएसएस है, अगर इस ताकत को छीन लिया जाय या आरएसएस को बीजेपी से अलग कर दिया जाय तो बीजेपी अपने आप ख़त्म हो जाएगी, अगर बीजेपी ख़त्म हो गयी तो मोदी भी अपने आप ख़त्म हो जाएंगे.

शिवसेना इस वक्त कहने को तो बीजेपी के साथ है लेकिन काम कांग्रेस पार्टी के लिए कर रही है, कांग्रेस की तरह शिवसेना भी चाहती है कि 2019 में केंद्र में बीजेपी की हार हो जाए, शिवसेना अभी से हर मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी का साथ दे रही है, चाहे नोटबंदी का मुद्दा हो या कालेधन पर कार्यवाही का मुद्दा.

2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए शिवसेना बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत यानी संघ को बीजेपी से अलग करना चाहती है, इसीलिए एक प्लानिंग के तहत आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम राष्ट्रपति पद के लिए सुझाया गया और शिवसेना अभी भी इस बात पर अड़ी हुई है, गौरतलब ये है कि ना तो मोहन भागवत राष्ट्रपति बनना चाहते हैं और ना ही भारतीय जनता पार्टी उन्हें राष्ट्रपति बनाना चाहती है, मोहन भागवत पहले ही कह चुके हैं कि अगर उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया तो भी वे पद ठुकरा देंगे, वे संघ छोड़कर जा ही नहीं सकते.

अब शिवसेना को पता चल गया है कि मोहन भागवत राष्ट्रपति नहीं बन रहे हैं तो उन्होंने बीजेपी से सवाल पूछा है कि आप उन्हें राष्ट्रपति क्यों नहीं बना रहे हैं, आखिर क्या कमीं है उनमें, शिवसेना ने शर्त रखी है कि हम BJP को राष्ट्रपति चुनाव में तभी समर्थन देंगे जब मोहन भागवत को राष्ट्रपति ना बनाने का कारण बताया जाएगा.

शिवसेना सोच रही है कि मोहन भागवत को राष्ट्रपति बनाने की उसकी मांग का करोड़ों संघी भी समर्थन करेंगे, अगर बीजेपी मोहन भागवत को  राष्ट्रपति नहीं बनाएगी तो करोड़ों संघी बीजेपी से नाराज हो जाएंगे, ये संघी या तो बीजेपी से अलग हो जाएंगे या शिवसेना में शामिल हो जाएंगे. जब संघ ही नहीं रहेगा तो बीजेपी अपने आप ख़त्म हो जाएगी.

शिवसेना के लिए निराशाजनक बात ये है कि उसकी मांग का ना तो बीजेपी वाले समर्थन कर रहे हैं और ना ही संघी क्योंकि संघी जानते हैं अगर मोहन भागवत संघ से चले जाएंगे तो संघ कमजोर पड़ जाएगा क्योंकि इस वक्त संघ में उनसे बढ़िया लीडर नहीं है.

BJP वाले शिवसेना की बात का इसलिए समर्थन नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे एक तो संघ को कमजोर नहीं देखना चाहते और दूसरा मुस्लिम समुदाय को नाराज नहीं करना चाहते हैं क्योंकि आज विपक्षी पार्टियाँ मुस्लिमों को हिन्दू राष्ट्र के नाम से डरा रही हैं, अगर मोहन भागवत को राष्ट्रपति बनाया गया तो मुस्लिमों को यह बताकर डराया जाएगा कि बीजेपी भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती है, अब भारत से तुम्हें भगा दिया जाएगा.
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