Jun 29, 2017

गाय की कहानी सुनाते हुए भावुक हो गए PM MODI: आप भी पढ़ें


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Ahmedabad, 29 June: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अहमदाबाद में साबरमती आश्रम की 100वीं वर्षगाँठ पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया, मोदी ने देश के वर्तमान माहौल पर नाराजगी जताई. मोदी ने कहा कि मैं देश के वर्तमान माहौल से बहुत नाराज हूँ और पीड़ा फील कर रहा हूँ. 

मोदी ने कहा कि जो देश एक चींटी को भी आटा डालता हूँ, जो देश गली के एक कुत्तों को भी रोटी खिलाता हो, जो देश सुबह उठकर नदी और तालाब के तट मछलियों को खाना खिलाने जाता हो, जिस देश में महात्मा गाँधी जैसे महापुरुष में अहिंसा का पाठ पढ़ाया हो क्या हो गया है मेरे देश के लोगों को कि अस्पताल में डॉक्टर अगर किसी मरीज को ना बचा पायें, ऑपरेशन विफल हो जाए, दवा कारगर सिद्ध ना हो पाए और मरीज की मृत्यु हो जाए तो अचानक परिवारजन अस्पताल को आग लगा देते हैं, डॉक्टर को मारने पीटने लगते हैं, क्या ये मेरा देश है. क्या ये पूज्य बापू का देश है.  

मोदी ने कहा कि हम क्या कर रहे हैं, आज इन्हीं चीजों को बढ़ावा मिल रहा है, अकस्मात अकस्मात होता है, कहीं पर दो गाड़ियाँ टकरा गयीं और दुर्भाग्य से किसी एक की मौत हो गयी या किसी को चोट लग गयी, इसके बाद ना जान ना पहचान, 50 लोग इकठ्ठे हो जाते हैं और गाड़ियाँ जला देते हैं. क्या ये मेरा देश है.

मोदी ने कहा कि गाय की रक्षा, गाय की भक्ति महात्मा गाँधी और विनोबा भावे से अधिक कोई नहीं कर सकता, अगर गाय की भक्ति करनी है या गाय की रक्षा करनी है तो गांधीजी और विनोबा जी ने हमें उत्तर रास्ता दिखाया है और उसी रास्ते पर देश को चलना ही पड़ेगा, उसी रास्ते पर देश का कल्याण है.

मोदी ने कहा कि भारत का संविधान भी हमें गौ रक्षा सिखाता है लेकिन क्या गाय की रक्षा के लिए किसी इंसान को मारने का हमें हक मिल जाता है, क्या ये गौ भक्ति है, क्या ये गौ-रक्षा है. पूज्य बापू का रास्ता ये नहीं हो सकता, विनोबा भावे का जीवन हमें से सन्देश नहीं देता है इसलिए साबरमती आश्रम की शाताब्दी के पर्व पर हमें समझना चाहिए कि हिंसा का रास्ता ठीक नहीं है.

मोदी ने कहा कि - हमें समझना चाहिए, हम कैसे अपना आपा खो रहे हैं, मरीज मर जाए तो डॉक्टर को मार दें, एक्सीडेंट हो जाए तो ड्राईवर को मार दें, गाय के नाम पर इंसान को मार दें, यह गलत है. मोदी ने इसके बाद अपने बचपन की एक घटना सुनाई.

गाय से सम्बंधित मोदी के बचपन की घटना

मोदी ने बताया - उस समय मैं बालक था, मेरा घर एक संकरी गली में था, वहां पर जिस तरह से पुराने गाँव में होते हैं उसी तरह से आपस में सटे हुए घर थे, हमारे घर से थोडा आगे एक परिवार था तो इमारत में दरवाजे लगाने का काम करता था, एक तरह से मजदूरी जैसा काम था.

उस परिवार में संतान नहीं थी, शादी के बाद कई वर्ष बीत गए इसलिए परिवार के लोग संतान ना होने से दुखी रहते थे, काफी वर्षों बाद उनके घर में एक संतान हुई और धीरे धीरे बालक 4-5 साल का हो गया.

मोदी ने कहा कि हमारी गली में रोज एक गाय आती थी तो गली के लोग जब घर से बाहर निकलते थे तो उसे कुछ ना कुछ खिलाते रहते थे, जिन परिवार के यहाँ संतान हुई थी वे लोग भी गाय को कुछ ना कुछ खिलाते रहते थे. एक दिन अचानक कोई घटना हुई तो वह गाय हडबडा गयी और दौड़ने लगी, दौड़ते दौड़ते स्थित यह बनीं कि वह बच्चा भी गाय के सामने दौड़ने लगा और गाय के पैरों के नीछे आकर मर गया.

मोदी ने कहा कि इतने वर्षों बाद उस परिवार के यहाँ संतान हुई थी और गाय के पैरों के नीचे आकर बच्चा ख़त्म हो गया तो परिवार के लोग बहुत दुखी हुए, दूसरे दिन सुबह ही वह गाय उनके घर के सामने आकर खड़ी हो गयी, उसनें किसी भी घर के सामने जाकर रोटी नहीं खिलाई, मोदी यह बताते बताते भावुक हो गये.

मोदी ने कहा कि - इस घटना के बाद गाय के आंसू नहीं रुक रहे थे, उसनें रोटी खानी छोड़ दी, उसके आंसू कभी नहीं रुके, एक दिन, दो दिन, तीन दिन, गाय ने खाना ही छोड़ दिया, गाय ना पानी पी रही थी, ना रोटी खा रही थी, एक तरफ परिवार को इकलौते संतान की मृत्यु का शोक था, पूरे मोहल्ले में दुःख था और दूसरी तरफ गाय पश्चाताप में रो रही थी, कई दिनों तक उसनें कुछ नहीं किया उसके बाद उसकी आँख के आंसू सूख गए, पूरे मोहल्ले के लोग लाख कोशिश करते रहे लेकिन गाय ने अपना संकल्प नहीं छोड़ा और पश्चाताप में अपना शरीर त्याग दिया.

मोदी ने कहा कि - एक बालक की मृत्यु के पश्चाताप में एक गाय को अपना शरीर त्यागते हुए मैंने बचपन में देखा है, वो दृश्य आज भी मेरी आँखों में जिन्दा है और आज मैं जब सुनता हूँ कि गाय के नाम पर किसी की हत्या की जाए, अगर वह गुनाहगार है तो कानून उसे सजा देगा, इंसान को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है.

मोदी ने कहा कि मैं देशवासियों से आग्रह करना चाहता हूँ कि हिंसा इन सब समस्याओं का समाधान नहीं है, उस डॉक्टर का दोष नहीं है तो आपके परिवार जन की रक्षा कर रहा था लेकिन उसे बचा नहीं पाया, अगर आपको कोई शिकायत हो तो कानूनी व्यवस्था है, अकस्मात हो जाता और किसी निर्दोष की जान चली जाती है तो उसे अकस्मात समझना चाहिए. गांधीजी के देश में हिंसा का स्थान नहीं है.
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