May 27, 2017

पढ़ें: मोदी से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने क्या कहा?


nitish-kumar-meet-pm-narendra-modi-thereafter-talk-to-media
New Delhi: आज अपने साथियों को जलता-मचलता छोड़कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंगा सफाई के बहाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और उनसे बहुत ही गर्मजोशी के साथ बात की, मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने प्रेस को संबोधित किया. इससे पहले नीतीश कुमार मोदी द्वारा मौरीसस के प्रधानमंत्री के लिए आयोजित लंच में भी सिरकत की.

मोदी से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि मौरीसस की कुल आबादी का 50 फ़ीसदी से भी अधिक लोगों का मूल बिहार से है इसलिए हमारा उनसे एक भावनात्मक लगाव है, इसलिए जब हमारे प्रधानमंत्री ने मौरीसस के प्रधानमंत्री के सम्मान में लंच का आयोजन किया और मुझे न्योता दिया तो मैंने भी सोचा कि यहाँ पर आना चाहिए.

नीतीश कुमार ने कहा की जब हम यहाँ आ रहे थे तो हमने सोचा कि प्रधानमंत्री मोदी के सामने बिहार की जो सबसे ज्वलंत समस्या है, जो गंगा नदी की अविरलता के वजह से कटाव के कारण जो बुरा प्रभाव पड़ रहा है, उसकी चर्चा कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि इस सवाल को हम लगातार उठा रहे हैं और पिछले वर्ष बाढ़ के बाद हम अगस्त महीने में माननीय प्रधानमंत्री से मिले थे और उसके पहले भी गंगा बेसिन मॉनिटरिंग कमेटी के गठन के बाद हमने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समक्ष भी इस सवाल को उठाया था.

नीतीश कुमार ने कहा कि अभी जो समस्या है, सिल्ट की समस्या और भी गंभीर होती जा रही है और इस बार भी बाढ़ का खतरा है, इसलिए हमने सोचा कि मोदी से इस समस्या की चर्चा करते हैं और इस मामले में क्या काम हुआ है इसकी जानकारी ले लेते हैं. हमने मोदी को इस विषय मोदीजी को एक विस्तृत पत्र भी दिया है और कहा कि कमेटी में को भी शामिल है उसनें बिना फील्ड विजिट किये हुए रिपोर्ट बना दी है. उन्हें व्यावहारिक रूक से जाकर जब तक गंगा का सर्वे नहीं करेंगे वे लोग मामले की गंभीरता को नहीं समझेंगे.

नीतीश कुमार ने कहा कि मेरा मोदीजी से आग्रह है कि 10 तारीख को मानसून के तुरंत बाद गंगा नदी में पाने बढ़ जाएगा इसलिए सिल्ट की समस्या नहीं दिखेगी इसलिए हमें प्रधानमंत्री मोदी से विशेष तौर पर कहा है कि 10 तारीख से पहले एक विशेषज्ञों की टीम जाय और वो सीधे गंगा नदी की स्थिति को देखे, उसका आकलन करे और उसके बाद सिल्ट मैनेजमेंट पालिसी के बारे में विचार करें.

नीतीश कुमार ने कहा कि जब हम सिल्ट मैनेजमेंट की बात करते हैं तो इसका मतलब सिल्ट को हटाना नहीं है बल्कि गंगा की धार के हिसाब से सिल्ट जानी चाहिए, फरक्का में धान की खेती हो रही है, कई कमेटियों ने धान की स्थिति और उसकी कमियों के बारे में कहा है, इन सब चीजों को तत्काल देखना बहुत जरूरी है वरना इस वर्ष भी बाढ़ आएगी और पिछले पांच वर्षों में बाढ़ से जो तटवर्ती इलाकों में कटाव होता है और बाढ़ का दुष्प्रभाव होता है उससे बचाव के लिए पिछले पांच वर्षों में 1000 करोड़ से भी अधिक राज्य सरकार को खर्च करना पड़ा, इन सब बातों को हमने आज माननीय प्रधानमंत्री मोदी के सामने रखा है और इसके अलावा इस मामले में विस्तृत दस्तावेजों को उनके सुपुर्द किया है.

नीतीश कुमार ने अंत में कहा कि मैं इस बात के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी का धन्यवाद देता हूँ, वे 10 जून से पहले विशेषज्ञों की टीम को भेजने पर राजी हो गए हैं, इसके अलावा उन्होने सम्बंधित विभागों को जल्द से जल्द कार्यवाही के आदेश दिए हैं.
नीचे कमेन्ट बॉक्स में अपनी राय लिखें
पोस्ट शेयर करें और फेसबुक पेज LIKE करें
loading...

0 comments: