Apr 16, 2017

जिहादियों को विकास से सुधारना चाहते हैं MODI, कैंसर का इलाज नहीं होता, काटकर फेंक दिया जाता है?


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New Delhi: इस वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कश्मीर मसले पर युद्ध स्तर से काम कर रहे हैं लेकिन उनकी रणनीति पूरी तरह से फेल हो गयी है, कल श्रीनगर-बडगाम लोकसभा उपचुनाव में इसका सबूत भी मिल गया क्योंकि घाटी के लोगों ने PDP और BJP को छोड़कर नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला को वोट दिया वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वे पत्थरबाजों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं, उन्हें देशभक्त बता रहे हैं.

मोदी कश्मीर में विकास की पॉलिसी पर काम कर रहे हैं, उन्हें शायद ग़लतफ़हमी हो गयी है कि अगर वे कश्मीरियों को डूबने से बचा लेंगे, अगर वे कश्मीर का विकास करा देंगे, पहाड़ों को खोदकर उनके अन्दर 9 सुरंगे बना देंगे, बड़े बड़े और चौड़े रोड बना देंगे तो कश्मीर के पत्थरबाज अपने आप सुधर जाएंगे और पत्थरबाजी छोड़कर देशभक्त बन जाएंगे.

अब आप खुद सोचिये, विकास तो फ़्रांस में भी है, अमेरिका में भी है, रूस और जर्मनी में भी है, तो वहां पर जिहाद और आतंकवाद क्यों नहीं ख़त्म  हो रहा है, आप खुद सोचिये, जिहाद और इस्लामिक कट्टरवाद की वजह से ही अमेरिका वालों ने ट्रम्प को वोट दिया. आप खुद सोचिये, अमेरिका विश्व का सबसे विकसित देश माना जाता है फिर भी वहां पर जिहाद है, इस्लामिक कट्टरवाद है, जिहादी लोग शरियत कानून लागू करना चाहते हैं और इसी खतरे को देखकर अमेरिका के लोगों ने बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन को सत्ता से बाहर कर दिया और राष्ट्रवाद और इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ लड़ने की की बात करने वाले डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति बना दिया.

अब आप खुद सोचिये, क्या जिहादी विचारधारा वाले लोग विकास से सुधर सकते हैं, अगर विकास से सुधर सकते तो अमेरिका में जिहाद ना होता, फ़्रांस, रूस और जर्मनी में भी जिहाद ना होता लेकिन ऐसा नहीं है, इन सभी देशों में जिहाद है, आतंकवादी हमले हो रहे हैं.

तो निष्कर्ष ये निकलता है कि कश्मीर में जिहाद की वजह से वहां के लोग आजादी मांग रहे हैं, सैनिकों पर पत्थरबाजी कर रहे हैं, सैनिकों को थप्पड़ मार रहे हैं, इनकी संख्या हजारों में नहीं बल्कि लाखों में है क्योंकि चुनाव में सिर्फ 7 फ़ीसदी यानी करीब 50 हजार लोगों ने वोट दिया और उन्होंने पत्थरबाजों का समर्थन करने वाले फारूक अब्दुल्ला को वोट दिया, 93 फ़ीसदी लोगों ने वोट ना देकर अलगाववादियों का समर्थन किया, मतलब, उन्हें विकास नहीं चाहिए, उन्हें कश्मीर की आजादी चाहिए ताकि वे इस्लामिक कानून के अनुसार रह सकें, उनकी आँखों में जिहाद का नशा है इसीलिए वे सीने पर गोलियां खा लेते हैं. अब वे सुधरने वाले नहीं हैं, अब उन्होंने कैंसर का रूप ले लिया है.

हमारी राय में मोदी को ग़लतफ़हमी से बाहर निकलना चाहिए, कश्मीर में विकास कराओ, उसके लिए आपको कोई नहीं रोक रहा है लेकिन कम से कम सैनिकों को इतनी तो ताकत तो दो कि अगर कोई पत्थरबाज सेना को थप्पड़ मारने की कोशिश करे तो उसे गोलियों से भून दो, अगर एक सामने आये तो उसे भून दो, अगर 100 सामने आयें तो उन्हें भी भून दो क्योंकि ये जिहादी हैं, इन्हें विकास से कोई लेना देना नहीं है, ये भारत के लिए एक कैंसर के समान हैं. जब कैंसर लाइलाज हो जाता है तो उसे काटकर निकालना पड़ता है.

मोदी को चाहिए कि अब जिहाद की बीमारी को समझ लें वरना विकास ये कराएँगे लेकिन जिहादी लोग वोट फारूख अब्दुल्ला को देंगे, 80 हजार करोड़ रुपये हमारे टैक्स के पैसों से जाएंगे, मतलब धक्के हम खाएंगे और मौज फारूख अब्दुल्ला मारेंगे. कैंसर का सिर्फ एक इलाज है, उसे काटकर निकाल दो, अगर पत्थरबाजों को आजादी चाहिए तो उन्हें जिन्दगी से आजाद कर दो क्योंकि कश्मीर तो हम किसी कीमत पर देंगे नहीं क्योंकि अगर कश्मीर गया तो भारत भी गया, जब हमारा सिर ही नहीं रहेगा तो शरीर कैसे जिन्दा रहेगा.

इसलिए मोदी को अब गाँधी नहीं बल्कि सुभाषचन्द्र बोस बनना होगा, देश के कैंसर का काटकर इलाज करना पड़ेगा, पत्थरबाजों और जिहादियों की सिर्फ एक सजा होनी चाहिए, सैनिकों को आदेश दो, अगर कोई थप्पड़ मारे तो उसे गोलियों से भूल दो, जो होगा देख लिया जाएगा.

एक बात और, कश्मीर समस्या एक दो दिन में नहीं खड़ी की गयी है, यह सब स्क्रिप्ट के मुताबिक हो रहा है, योजनानुसार काम हो रहा है, इसके लिए पहले हिन्दुओं को चुन चुनकर मारा गया, उन्हें कश्मीर से भगाया गया, कश्मीर में मस्जिदों का जाल बिछाया गया ताकि आतंकवादियों और जिहादियों को छुपने का ठिकाना मिल सके, इसके अलावा मस्जिदों के लाउडस्पीकर घोषणा करके जिहादियों को इकठ्ठा किया जा सके, मस्जिदें और मदरसे बनाने के लिए उन्हें सभी इस्लामिक देशों से मदद मिली, सऊदी अरब से पैसे भेजे जाते हैं, बहुत बड़ी बड़ी ताकतें काम कर रही हैं कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए, सिर्फ पाकिस्तान नहीं है, सभी इस्लामिक देश इस काम में लगे हैं, हर जगह से पैसे आ रहे हैं, यह खतरा छोटा नहीं है बल्कि बहुत बड़ा है, भारत को अब जिहादियों के खिलाफ लड़ाई छेड़नी पड़ेगी, सैनिकों को छूट देनी पड़ेगी, वे खुद जिहादियों से निपट लेंगे.
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