Apr 17, 2017

जिहादी पत्थरबाजों से आप कितनी भी घृणा करो लेकिन ये दोनों हैं कश्मीर समस्या की असली जड़: पढ़ें


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Srinagar, 17 April: हो सकता है कि आप लोग आजकल जिहादी पत्थरबाजों से नफरत कर रहे हों, उन्हें गालियाँ दे रहे हों, उनपर कार्यवाही करने की मांग कर रहे हों या उन्हें कश्मीर समस्या की असली जड़ बता रहे हों लेकिन कश्मीर समस्या की जड़ पत्थरबाज नहीं हैं बल्कि दो राजनीतिक पार्टियाँ और उन पार्टियों के नेता हैं जो बदल बदल कर पत्थरबाजों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं, जब एक की पारी शुरू होती है तो दूसरा पत्थरबाजों के साथ हो जाता है और जब दूसरे की पारी शुरू होती है तो पहला पत्थरबाजों के साथ हो जाता है.

आपने देखा होगा कि कल श्रीनगर-बडगाम लोकसभा उपचुनावों में NC नेता फारूक अब्दुल्ला की जीत हुई, ऐसा इसलिए क्योंकि वे इस वक्त पत्थरबाजों का समर्थन कर रहे हैं, इससे पहले यहाँ पर PDP की जीत हुई थी क्योंकि उस समय वे पत्थरबाजों का समर्थन कर रहे थे.

आपको याद होगा जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की सबसे कट्टर विरोधी PDP थी, यानी मुफ़्ती मुहम्मद सईद और उनकी बेटी महबूबा मुफ़्ती उस समय बीजेपी की कट्टर विरोधी थीं, मुफ़्ती मुहम्मद सईद ने तो इतना कह दिया था कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बना तो वे पाकिस्तान चले जाएंगे.

इसका मतलब यह है कि उस समय महबूबा मुफ़्ती और उनके अब्बा मुफ़्ती मुहम्मद सईद पत्थरबाजों और आजादी के हिमायती थे और पत्थरबाजों और जिहादियों ने उन्हें वोट भी इसीलिए दिया था ताकि वो उनके जिहाद यानी आजादी का समर्थन करते रहें.

मामला तब फंस गया जब जम्मू में बीजेपी को वोट मिले और कश्मीर में PDP को, दोनों कट्टर विरोधी थे.दोनों ही पार्टियाँ अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती थीं.सत्ता के लालच में PDP को BJP के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ी.

BJP ने PDP के साथ इसलिए सरकार बनाई क्योंकि BJP को पता था कि हम पत्थरबाजों के सरदारों से हाथ मिला रहे हैं इसलिए अब यहाँ पर शांति रहेगी मतलब. पत्थरबाज अपने सरदारों का कहना जरूर मानेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि पत्थरबाजों को लग रहा है कि PDP ने हमारे साथ वादाखिलाफी करके BJP के साथ सरकार बना ली, अब वे NC के साथ यानी फारूख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के साथ हो गए हैं या ऐसा भी कह सकते हैं कि अब फारूख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला पत्थरबाजों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.

अब पत्थरबाजों के सरदार उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला बन गए हैं. मतलब पहले बाप-बेटी पत्थरबाजों के सरदार थे तो अब बाप-बेटे पत्थरबाजों के सरदार बन गए हैं.

इन लोगों की यही पालिसी है, ये दोनों पार्टियाँ यानी NC और PDP सत्ता की भूखी पार्टियाँ हैं. जब ये सत्ता से बाहर रहते हैं तो पत्थरबाजों के साथ हो जाते हैं और जब सत्ता में होते हैं तो केंद्र की पालिसी का समर्थन कर रहे हैं. आपको याद होगा, जब उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे तो केंद्र की पालिसी का समर्थन करते थे और उनकी सरकार में भी 100-150 पत्थरबाजों को ठोंका गया था.. 

जब उमर अब्दुल्ला सरकार के समय सेना पत्थरबाजों को ठोंकती थी तो महबूबा मुफ़्ती पत्थरबाजों के समर्थन में खड़ी रहती थीं और उन्हें भड़काती थीं, भड़काऊ भाषण देती थीं, अलगाववादियों का समर्थन करती थीं. अब महबूबा मुफ़्ती की सरकार में सेना पत्थरबाज को ठोंक रही है तो उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला पत्थरबाजों के समर्थन में खड़े हो गए हैं.

मतलब कश्मीर समस्या की मूल जड़ PDP और NC यानी महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला हैं. पहले इन दोनों नेताओं के पिता इस समस्या के लिए जिम्मेदार थे लेकिन अब उन्होंने अपनी जिम्मेदारी इन दोनों के कन्धों पर डाल दी है.
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