Apr 22, 2017

किसानों को पेशाब पिलाकर बड़ी ताकतें मोदी के खिलाफ कर रही हैं बहुत बड़ी साजिश, आप भी समझें इसे


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नई दिल्ली, 22 अप्रैल: उनकी साजिश है किसानों को मोदी के खिलाफ भड़काया जाए, पूरे देश के किसानों को मोदी के खिलाफ खड़ा कर दिया जाए ताकि 2019 में उनकी वापसी ना हो पाए, इसलिए अगर कुछ किसानों को मरे हुए सांप खिला दिया जाए, पेशाब पिला दिया जाए या मल ही खिला दिया जाए और इस काम के लिए भले ही कितना पैसा खर्च हो जाए कोई फर्क नहीं पड़ता, बस मोदी की वापसी ना हो सके, हमारे देश के दुश्मन यही चाहते हैं और इसी वजह से आज कुछ किसानों ने मूत्र पीकर मोदी का विरोध किया.

तमिलनाडु के कुछ लोग किसान बनकर जंतर मंतर पर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, हालाँकि अब इनकी पोल भी खुलने लगी है, इनमें से बहुत कम हैं जो किसान हैं, असलियत में ये लोग पेड प्रदर्शनकारी हैं तो किसान बनकर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं वरना आप खुद समझिये, इन लोगों को तमिलनाडु सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए था लेकिन इन्होने ऐसा नहीं किया, इन्होने दिल्ली में आकर प्रदर्शन शुरू किया, पहले मरे हुए सांप खाए, फिर नग्न प्रदर्शन किया, आज पेशाब पिया और अब कुछ दिन में मल भी खाएंगे.

अगर इनके प्रदर्शन को सच मान लिया जाए तो ऐसा लग रहा है कि तमिलनाडु की सरकार या तो सो रही है या किसानों को दिल्ली में भेजकर और उनसे धरना प्रदर्शन करवाकर केंद्र सरकार पर दबाव बना रही है, तमिलनाडु में AIADMK की बहुमत की सरकार है, किसानों की भलाई करना, उनकी मदद करना, उन्हें सूखा राहत या बाढ़ राहत पैकेज जारी करना उनका काम है लेकिन ऐसा लग रहा है कि वहां की सरकार सो रही है, उन्हें किसानों की कोई चिंता ही नहीं है या कुछ कलाकारों को किसान बनाकर मोदी सरकार को बदनाम किया जा रहा है.

यह भी समझ में नहीं आ रहा है कि तमिलनाडु के किसना अपनी सरकार के सामने प्रदर्शन करने के बजाय केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं, उन्हें तमिलनाडु सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए, कम से कम यह तो पता चले कि उन्होंने तमिलनाडु सरकार के सामने अपनी मांग रखी थी लेकिन उनकी सरकार ने किसानों की मांग नहीं मानी इसलिए अब वे दिल्ली में प्रदर्शन करने आये हैं, यह भी समझ में नहीं आ रहा है कि वे अपनी राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं, वे केंद्र सरकार के खिलाफ ही क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं, अगर वे केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं तो आखिर क्यों.

आज तो किसानों ने विरोध जताने के लिए पेशाब पी लिया, सभी ने एक बर्तन में पेशाब एकत्रित किया और उसे ही पानी की तरह पी लिया, अब उन्होने गू खाने की भी धमकी दी है, अगर उनकी बात नहीं मानी गयी तो वे मानव मल खाकर विरोध करेंगे.

किसानों का कहना है कि वे केंद्र से कर्जमाफी और वित्तीय सहायता की मांग के लिए धरने पर बैठे हैं, सूखे के कारण उनकी फसल मारी गयी है, अगर ऐसा है तो इन्होने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिये अपनी फसलों का बीमा क्यों नहीं कराया, अगर वे बीमा करा लेते तो उन्हें उनकी फसल का हर्जाना देना केंद्र सरकार का काम था, अगर केंद्र सरकार पूरे देश के किसानों का कर्ज माफ़ कर देगी तो देश की GDP गिर जाएगी, ऐसे में विरोधी यह नहीं देखेंगे कि केंद्र ने किसानों का कर्जा माफ़ किया है, वे यही कहेंगे कि मोदी सरकार फ़ैल हो गयी, GDP घट गयी है, आर्थिक हालत खराब हो गयी है, ऐसा करने के लिए मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम पहले से तैयार बैठे हैं और मौके का इन्तजार कर रहे हैं, हाल ही में आपने नोटबंदी के बाद देखा होगा, विरोधी पार्टियाँ यही आरोप लगा रही थीं.

इन किसानों के नए नए तरीके से प्रदर्शन देखकर ऐसा लग रहा है कि कोई बड़ी शक्ति मोदी सरकार के खिलाफ बहुत बड़ी साजिश कर रही है और किसानों को मोदी सरकार के खिलाफ भड़काना चाहती है क्योंकि पहले तो इन किसानों ने मरे हुए साँप खाए, उसके बाद नग्न प्रदर्शन किया, आज पेशाब पिया और कुछ दिन में मल भी खाएंगे, आखिर वित्तीय मदद मांगने के लिए इतना सब करने की क्या जरूरत है, उत्तर प्रदेश के किसानों की भी हालत सही नहीं थी लेकिन उन्होने तो मोदी सरकार के खिलाफ ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं किया, तमिलनाडु तो विकसित और अमीर राज्य माना जाता है, तो फिर वहां के किसानों की हालत इतनी खराब क्यों है और ये लोग अपनी राज्य सरकार के बजाय केंद्र सरकार और खासकर मोदी को क्यों बदनाम कर रहे हैं.

मेरा खुद का ये मानना है कि ये सब केंद्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बहुत बड़ी साजिश है क्योंकि आज तक इस तरह से किसी भी राज्य के किसानों ने केंद्र के सामने और खासकर मोदी के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन नहीं किया, किसानों को अपनी राज्य सरकार के सामने प्रदर्शन करना चाहिए, उनसे मदद मांगनी चाहिए, अगर वे मदद ना करें तो ऐसी सरकारें एक्सपोज भी होनी चाहियें और राज्य की सरकार को पता चलना चाहिए कि उन्हें सरकार सुनकर क्या मिला, तमिलनाडु के लोगों ने तो राज्य में AIADMK की सरकार चुकी और लोकसभा चुनाव में भी उन्हें ही वोट दिया. अब मदद भी तमिलनाडु की सरकार को करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है.
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